बुधवार, 28 सितंबर 2016




    पड़ाेसियाें के बीच फिर प्रेम की डाेर बनेंगे शहीद भगत सिंह


    भारत-पाकिस्तान में तनाव चरम पर है। दाेनाें तरफ से जमकर भाषणबाजी हाे रही है। क्रिकेट, पानी और  सार्क जैसे तमाम डिप्लाेमेसी मंच फेल हाे चुके हैं। इतने तनाव के बीच बुधवार काे शहीद भगत सिंह का जन्मदिन पाकिस्तान के गांव बंगा में जिस उत्साह के साथ मनाया गया, वाे शांति की माम उम्मीदें जगा गया।
    फैसलाबाद जिले की तहसील जरानवालां के गांव बंगा में भगत सिंह के पैतृक घर में जितनी भीड़ जुटी, उसे वहां की सिविल साेसाइटी में तमाम उम्मीदें जग गर्इं। असलम लाेहार और जस्सी लखपुरिया ने जब 'मेरा रंग दे वंसती चाेला' गाया ताे कालेज के सैकड़ाें विद्यार्थियाें और  शहीद मेले में माैजूद हजाराें लाेगाें की अांखें भर अार्ईं। फैसलाबाद की गवर्नमेंट कालेज यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियाें ने अपनी चर्चित शार्ट फिल्म 'स्वराज' का ट्रेलर इसी शहीद मेले में लांच कर भगत सिंह काे सच्ची श्रद्धांजलि दी।
   सवाल शहीद सिंह काे सिर्फ याद करने और मेले का नहीं है। सवाल है शहीद के जरिए उस डाेर काे जिंदा बचाये रखने की जिसकी जरूरत बार्डर के दाेनाें ओर के लाखाें लाेग चाहते हैं। ऐसा नहीं हाेता ताे कट्टरपंथियाें की धमकियाें के बावजूद शहीद भगत सिंह के गांव में एक हजार से ज्यादा लाेग न जुटते। बच्चे-बूढ़े और महिलाएं शहीद मेले में असलम लाेहार काे सुनने नहीं आते.. और खुद असलम लाेहार भगत सिंह, राम प्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्ला के जुबान पर सुशाेभित हाे चुके गीताें काे न गाते।
   महान व्यक्तित्व सदियाें तक प्रेरित करता है। अाज पाकिस्तान में भगत सिंह के जन्मदिन पर शहीद मेले के आयाेजन ने साबित कर दिया। भारत की आजादी के नायक भगत सिंह के प्रति दाेनाें तरफ जाे सम्मान उनके 109वें जन्मदिन पर दिखा, लाेगाें में उनके सिद्धांताें और बाताें के प्रति जाे लगाव दिखा, वाे दाे पड़ाेसी मुल्काें के लाेगाें के बीच प्रेम की डाेर बन जाएगा, ऐसा दाेनाें तरफ की सिविल साेसाइटी का भराेसा है।twitter-@dixityogesh  email- yogeshnarayan.dixit@gmail.com
             

शनिवार, 25 जनवरी 2014

शनिवार, 11 जनवरी 2014

बाघिन काो लगा छपास राोग!

बाघिन काो लगा छपास राोग! 
पिछले साोमवार काो असल में पूस की ठंडी रात थी। अचानक बाघ के बच्चाों ने गुर्राते हुए अपनी मां यानी बाघिन से कहा, तुम जंगल में छाोटे-छाोटे जानवराों के सामने बड़ा गुर्राती हाो। तुम्हारे घर यानी जंगलाों काो काटने वाले, एके-47 जैसे न जाने कितने घातक हथियार रखने वाले अादमियाों के बीच जाकर कभी इसी तरह से गुर्रा कर दिखाअाो, तब हम भी गर्व से कह सकेंगे कि हमने बाघिन का दूध पिया है। अपने ही बच्चाों की बात मां के दिल काो छू गर्इ। अगले दिन उसने पूछ उठार्इ अाैर दहाड़ मारते हुए स्वदेशी तकनीक से विकसित  अासमान की ऊंचार्इ नाप रहे जीएसएलवी की तरफ देखा। उसके मन में एक पल के लिए अाया कि जैसे ही वह अादमी की बस्ती की अाेर जाएगी, काोर्इ सैटेलाइट या जीपीअारएस सिस्टम उसे ट्रैक कर लेगा।
      मानव ने तकनीक में ऊंचार्इ पा ली है, उसमें फंसने की साोचकर बाघिन का धैर्य जवाब देने लगा। लेकिन बच्चाों के कहे मुताबिक चूंकि वह बस्ती के नजदीक अा गर्इ थी, इसलिए रात काो वह एक घर के पीछे दुबक कर बैठ गर्इ। तभी उसके कानाों में टीवी पर चल रहे एक विज्ञापन की लाइन गूंजी, पहले इस्तेमाल करें...फिर विश्वास करें। उसे सुनते ही जैसे बाघिन काो दाोगुनी ताकत मिल गर्इ। उसने पश्चिम यूपी के उसी मकान के बाहर निकली महिला पर हमला बाोल दिया। न काोर्इ तकनीक उसकी राह की बाधा बनी अाैर न ही अत्याधुुनिक हथियाराों से लैस वनकर्मी व शूटर। बाघिन काो लगा कि वह बेकार ही जंगल-जंगल भटक रही थी, उसे पकड़ने की तकनीक ताो इन अादमियाों के पास भी नहीं है। उसने दूसरे दिन फिर मानव की ताकत काो पहचानने की काोशिश की। फिर सफलता। अखबाराों में बड़ी-बड़ी खबरें देखकर बाघिन काो अपना महत्व भी समझ में आ गया। इस समय जाो बिकता है वही छपता है। छपास का राोग उसकाो भी लग गया है।
 अब हालत यह है कि केजरीवाल अाैर माोदी काो पीछे छाोड़ वेस्ट यूपी की मीडिया में जितनी कवरेज उसे मिल रही है, उससे बाघिन का गुरूर हाो गया है। छपास राोग ने बाघिन काो इस कदर जकड़ लिया है कि उसे अपने बच्चाों की याद तक नहीं अा अा रही। उसे ताो कल फिर अखबार में जगह चाहिए, इसलिए एक शिकार अाज फिर करना हाोगा। यानी अखबार के लिए लीड तय है...
अाैर उसकाो पकड़ने या मारने के अभियान में लगे सरकारी अमले अपने ध्येय वाक्य काो चरितार्थ करने में लगे हैं....शाोर नया...ढर्रा वही।
  
   

शुक्रवार, 10 जनवरी 2014