शनिवार, 8 अक्टूबर 2016
What Makes A Young Man Different
फाैलादी इरादे हाें ताे सुमित भी बन सकते हाे!
काम संस्थान का था। तलाश ऐसे युवाअाें की करनी थी जिन्हाेंने अपनी किसी शारीरिक कमजाेरी का राेना राेने के बजाय खुद काे फाैलाद बना लिया हाे। कर्ई प्रतिभाएं आर्ईं। एक से बढ़कर एक। एक केबिन में सबकी उपलब्धियाें पर फिल्म बन रही थी। मैं खुद ऐसे बिरले लाेगाें से मिलने उनके केबिन में गया। वहीं साैम्य और मिलनसान बिजनाैर के सुमित कुमार से मुलाकात हुर्ई। संस्थान का प्राेग्राम हिट हुअा और फिर शुरू हुआ सुमित के बारे में जानने का सिलसिला।
उस जिद्दी, जुनूनी आैर जांबाज सुमित कुमार से मैसेंजर और मैसेज पर बात शुरू हुर्ई, जाे सिर्फ अपने लक्ष्य पर बात करता था। सरजी, क्या बीसीसीआर्ई की तर्ज पर विकलांग क्रिकेट खिलाड़ियाें की काेर्ई संस्था नहीं खड़ी हाे सकती? क्या कल के मैच की कवरेज हाे सकती है। सरजी क्या यूपी दिवयांग क्रिकेट टीम के खिलाड़ियाें की सफलता की कहानी ऑल एडिशन छप सकती है? इसके बाद उनका जब फाेन या मैसेज आया यूपी दिव्यांग क्रिकेट टीम की सफलता की काेर्ई नर्ई कहानी बताने के लिए आया। बीते हफ्ते जब उन्हाेंने अपने केंद्रीय विद्यालय में अंबाला में शिक्षक चुने जाने की जानकारी दी, तब मेरा मन अनायास उनके जुनून काे प्रणाम करने काे अातुर हाे गया। लायक पुत्र अपने पिता काे सच्ची श्रद्धांजलि कैसे दे सकता है, इसका उदाहरण भी उन्हाेंने पेश किया। कुछ दिन पहले जब उनके पिताजी ने इस संसार काे छाेड़, तब शायद सुमित ने संकल्प कर लिया था, आपका ये सपना भी पूरा करूंगा। ...और महज चंद महीनाें बाद ही वे केवी में टीचर बन गए।
मुझे विश्वास हाे गया कि सुमित और फाैलाद में काेर्ई फर्क नहीं है। वह जल्द ही हम सबका सपना पूरा कर सकेंगे जब बीसीसीअार्ई की तर्ज पर देश में दिव्यांग क्रिकेट के प्रबंधन के लिए काेर्ई संगठन बनेगा। तब क्रिकेट सिर्फ कुलीनाें का नहीं, दिव्यांग खिलाड़ियाें का भी सबसे लाेकप्रिय खेल बन सकेगा।
शुभकामना सुमित!
#sumitkumar # WestUP # DiwyangCricket #Ambala
काम संस्थान का था। तलाश ऐसे युवाअाें की करनी थी जिन्हाेंने अपनी किसी शारीरिक कमजाेरी का राेना राेने के बजाय खुद काे फाैलाद बना लिया हाे। कर्ई प्रतिभाएं आर्ईं। एक से बढ़कर एक। एक केबिन में सबकी उपलब्धियाें पर फिल्म बन रही थी। मैं खुद ऐसे बिरले लाेगाें से मिलने उनके केबिन में गया। वहीं साैम्य और मिलनसान बिजनाैर के सुमित कुमार से मुलाकात हुर्ई। संस्थान का प्राेग्राम हिट हुअा और फिर शुरू हुआ सुमित के बारे में जानने का सिलसिला।
उस जिद्दी, जुनूनी आैर जांबाज सुमित कुमार से मैसेंजर और मैसेज पर बात शुरू हुर्ई, जाे सिर्फ अपने लक्ष्य पर बात करता था। सरजी, क्या बीसीसीआर्ई की तर्ज पर विकलांग क्रिकेट खिलाड़ियाें की काेर्ई संस्था नहीं खड़ी हाे सकती? क्या कल के मैच की कवरेज हाे सकती है। सरजी क्या यूपी दिवयांग क्रिकेट टीम के खिलाड़ियाें की सफलता की कहानी ऑल एडिशन छप सकती है? इसके बाद उनका जब फाेन या मैसेज आया यूपी दिव्यांग क्रिकेट टीम की सफलता की काेर्ई नर्ई कहानी बताने के लिए आया। बीते हफ्ते जब उन्हाेंने अपने केंद्रीय विद्यालय में अंबाला में शिक्षक चुने जाने की जानकारी दी, तब मेरा मन अनायास उनके जुनून काे प्रणाम करने काे अातुर हाे गया। लायक पुत्र अपने पिता काे सच्ची श्रद्धांजलि कैसे दे सकता है, इसका उदाहरण भी उन्हाेंने पेश किया। कुछ दिन पहले जब उनके पिताजी ने इस संसार काे छाेड़, तब शायद सुमित ने संकल्प कर लिया था, आपका ये सपना भी पूरा करूंगा। ...और महज चंद महीनाें बाद ही वे केवी में टीचर बन गए।
मुझे विश्वास हाे गया कि सुमित और फाैलाद में काेर्ई फर्क नहीं है। वह जल्द ही हम सबका सपना पूरा कर सकेंगे जब बीसीसीअार्ई की तर्ज पर देश में दिव्यांग क्रिकेट के प्रबंधन के लिए काेर्ई संगठन बनेगा। तब क्रिकेट सिर्फ कुलीनाें का नहीं, दिव्यांग खिलाड़ियाें का भी सबसे लाेकप्रिय खेल बन सकेगा।
शुभकामना सुमित!
#sumitkumar # WestUP # DiwyangCricket #Ambala
बुधवार, 28 सितंबर 2016
पड़ाेसियाें के बीच फिर प्रेम की डाेर बनेंगे शहीद भगत सिंह
भारत-पाकिस्तान में तनाव चरम पर है। दाेनाें तरफ से जमकर भाषणबाजी हाे रही है। क्रिकेट, पानी और सार्क जैसे तमाम डिप्लाेमेसी मंच फेल हाे चुके हैं। इतने तनाव के बीच बुधवार काे शहीद भगत सिंह का जन्मदिन पाकिस्तान के गांव बंगा में जिस उत्साह के साथ मनाया गया, वाे शांति की माम उम्मीदें जगा गया।
फैसलाबाद जिले की तहसील जरानवालां के गांव बंगा में भगत सिंह के पैतृक घर में जितनी भीड़ जुटी, उसे वहां की सिविल साेसाइटी में तमाम उम्मीदें जग गर्इं। असलम लाेहार और जस्सी लखपुरिया ने जब 'मेरा रंग दे वंसती चाेला' गाया ताे कालेज के सैकड़ाें विद्यार्थियाें और शहीद मेले में माैजूद हजाराें लाेगाें की अांखें भर अार्ईं। फैसलाबाद की गवर्नमेंट कालेज यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियाें ने अपनी चर्चित शार्ट फिल्म 'स्वराज' का ट्रेलर इसी शहीद मेले में लांच कर भगत सिंह काे सच्ची श्रद्धांजलि दी।
सवाल शहीद सिंह काे सिर्फ याद करने और मेले का नहीं है। सवाल है शहीद के जरिए उस डाेर काे जिंदा बचाये रखने की जिसकी जरूरत बार्डर के दाेनाें ओर के लाखाें लाेग चाहते हैं। ऐसा नहीं हाेता ताे कट्टरपंथियाें की धमकियाें के बावजूद शहीद भगत सिंह के गांव में एक हजार से ज्यादा लाेग न जुटते। बच्चे-बूढ़े और महिलाएं शहीद मेले में असलम लाेहार काे सुनने नहीं आते.. और खुद असलम लाेहार भगत सिंह, राम प्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्ला के जुबान पर सुशाेभित हाे चुके गीताें काे न गाते।
महान व्यक्तित्व सदियाें तक प्रेरित करता है। अाज पाकिस्तान में भगत सिंह के जन्मदिन पर शहीद मेले के आयाेजन ने साबित कर दिया। भारत की आजादी के नायक भगत सिंह के प्रति दाेनाें तरफ जाे सम्मान उनके 109वें जन्मदिन पर दिखा, लाेगाें में उनके सिद्धांताें और बाताें के प्रति जाे लगाव दिखा, वाे दाे पड़ाेसी मुल्काें के लाेगाें के बीच प्रेम की डाेर बन जाएगा, ऐसा दाेनाें तरफ की सिविल साेसाइटी का भराेसा है।twitter-@dixityogesh email- yogeshnarayan.dixit@gmail.com
भारत-पाकिस्तान में तनाव चरम पर है। दाेनाें तरफ से जमकर भाषणबाजी हाे रही है। क्रिकेट, पानी और सार्क जैसे तमाम डिप्लाेमेसी मंच फेल हाे चुके हैं। इतने तनाव के बीच बुधवार काे शहीद भगत सिंह का जन्मदिन पाकिस्तान के गांव बंगा में जिस उत्साह के साथ मनाया गया, वाे शांति की माम उम्मीदें जगा गया।
फैसलाबाद जिले की तहसील जरानवालां के गांव बंगा में भगत सिंह के पैतृक घर में जितनी भीड़ जुटी, उसे वहां की सिविल साेसाइटी में तमाम उम्मीदें जग गर्इं। असलम लाेहार और जस्सी लखपुरिया ने जब 'मेरा रंग दे वंसती चाेला' गाया ताे कालेज के सैकड़ाें विद्यार्थियाें और शहीद मेले में माैजूद हजाराें लाेगाें की अांखें भर अार्ईं। फैसलाबाद की गवर्नमेंट कालेज यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियाें ने अपनी चर्चित शार्ट फिल्म 'स्वराज' का ट्रेलर इसी शहीद मेले में लांच कर भगत सिंह काे सच्ची श्रद्धांजलि दी।
सवाल शहीद सिंह काे सिर्फ याद करने और मेले का नहीं है। सवाल है शहीद के जरिए उस डाेर काे जिंदा बचाये रखने की जिसकी जरूरत बार्डर के दाेनाें ओर के लाखाें लाेग चाहते हैं। ऐसा नहीं हाेता ताे कट्टरपंथियाें की धमकियाें के बावजूद शहीद भगत सिंह के गांव में एक हजार से ज्यादा लाेग न जुटते। बच्चे-बूढ़े और महिलाएं शहीद मेले में असलम लाेहार काे सुनने नहीं आते.. और खुद असलम लाेहार भगत सिंह, राम प्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्ला के जुबान पर सुशाेभित हाे चुके गीताें काे न गाते।
महान व्यक्तित्व सदियाें तक प्रेरित करता है। अाज पाकिस्तान में भगत सिंह के जन्मदिन पर शहीद मेले के आयाेजन ने साबित कर दिया। भारत की आजादी के नायक भगत सिंह के प्रति दाेनाें तरफ जाे सम्मान उनके 109वें जन्मदिन पर दिखा, लाेगाें में उनके सिद्धांताें और बाताें के प्रति जाे लगाव दिखा, वाे दाे पड़ाेसी मुल्काें के लाेगाें के बीच प्रेम की डाेर बन जाएगा, ऐसा दाेनाें तरफ की सिविल साेसाइटी का भराेसा है।twitter-@dixityogesh email- yogeshnarayan.dixit@gmail.com
सदस्यता लें
संदेश (Atom)