पड़ाेसियाें के बीच फिर प्रेम की डाेर बनेंगे शहीद भगत सिंह
भारत-पाकिस्तान में तनाव चरम पर है। दाेनाें तरफ से जमकर भाषणबाजी हाे रही है। क्रिकेट, पानी और सार्क जैसे तमाम डिप्लाेमेसी मंच फेल हाे चुके हैं। इतने तनाव के बीच बुधवार काे शहीद भगत सिंह का जन्मदिन पाकिस्तान के गांव बंगा में जिस उत्साह के साथ मनाया गया, वाे शांति की माम उम्मीदें जगा गया।
फैसलाबाद जिले की तहसील जरानवालां के गांव बंगा में भगत सिंह के पैतृक घर में जितनी भीड़ जुटी, उसे वहां की सिविल साेसाइटी में तमाम उम्मीदें जग गर्इं। असलम लाेहार और जस्सी लखपुरिया ने जब 'मेरा रंग दे वंसती चाेला' गाया ताे कालेज के सैकड़ाें विद्यार्थियाें और शहीद मेले में माैजूद हजाराें लाेगाें की अांखें भर अार्ईं। फैसलाबाद की गवर्नमेंट कालेज यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियाें ने अपनी चर्चित शार्ट फिल्म 'स्वराज' का ट्रेलर इसी शहीद मेले में लांच कर भगत सिंह काे सच्ची श्रद्धांजलि दी।
सवाल शहीद सिंह काे सिर्फ याद करने और मेले का नहीं है। सवाल है शहीद के जरिए उस डाेर काे जिंदा बचाये रखने की जिसकी जरूरत बार्डर के दाेनाें ओर के लाखाें लाेग चाहते हैं। ऐसा नहीं हाेता ताे कट्टरपंथियाें की धमकियाें के बावजूद शहीद भगत सिंह के गांव में एक हजार से ज्यादा लाेग न जुटते। बच्चे-बूढ़े और महिलाएं शहीद मेले में असलम लाेहार काे सुनने नहीं आते.. और खुद असलम लाेहार भगत सिंह, राम प्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्ला के जुबान पर सुशाेभित हाे चुके गीताें काे न गाते।
महान व्यक्तित्व सदियाें तक प्रेरित करता है। अाज पाकिस्तान में भगत सिंह के जन्मदिन पर शहीद मेले के आयाेजन ने साबित कर दिया। भारत की आजादी के नायक भगत सिंह के प्रति दाेनाें तरफ जाे सम्मान उनके 109वें जन्मदिन पर दिखा, लाेगाें में उनके सिद्धांताें और बाताें के प्रति जाे लगाव दिखा, वाे दाे पड़ाेसी मुल्काें के लाेगाें के बीच प्रेम की डाेर बन जाएगा, ऐसा दाेनाें तरफ की सिविल साेसाइटी का भराेसा है।twitter-@dixityogesh email- yogeshnarayan.dixit@gmail.com
भारत-पाकिस्तान में तनाव चरम पर है। दाेनाें तरफ से जमकर भाषणबाजी हाे रही है। क्रिकेट, पानी और सार्क जैसे तमाम डिप्लाेमेसी मंच फेल हाे चुके हैं। इतने तनाव के बीच बुधवार काे शहीद भगत सिंह का जन्मदिन पाकिस्तान के गांव बंगा में जिस उत्साह के साथ मनाया गया, वाे शांति की माम उम्मीदें जगा गया।
फैसलाबाद जिले की तहसील जरानवालां के गांव बंगा में भगत सिंह के पैतृक घर में जितनी भीड़ जुटी, उसे वहां की सिविल साेसाइटी में तमाम उम्मीदें जग गर्इं। असलम लाेहार और जस्सी लखपुरिया ने जब 'मेरा रंग दे वंसती चाेला' गाया ताे कालेज के सैकड़ाें विद्यार्थियाें और शहीद मेले में माैजूद हजाराें लाेगाें की अांखें भर अार्ईं। फैसलाबाद की गवर्नमेंट कालेज यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियाें ने अपनी चर्चित शार्ट फिल्म 'स्वराज' का ट्रेलर इसी शहीद मेले में लांच कर भगत सिंह काे सच्ची श्रद्धांजलि दी।
सवाल शहीद सिंह काे सिर्फ याद करने और मेले का नहीं है। सवाल है शहीद के जरिए उस डाेर काे जिंदा बचाये रखने की जिसकी जरूरत बार्डर के दाेनाें ओर के लाखाें लाेग चाहते हैं। ऐसा नहीं हाेता ताे कट्टरपंथियाें की धमकियाें के बावजूद शहीद भगत सिंह के गांव में एक हजार से ज्यादा लाेग न जुटते। बच्चे-बूढ़े और महिलाएं शहीद मेले में असलम लाेहार काे सुनने नहीं आते.. और खुद असलम लाेहार भगत सिंह, राम प्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्ला के जुबान पर सुशाेभित हाे चुके गीताें काे न गाते।
महान व्यक्तित्व सदियाें तक प्रेरित करता है। अाज पाकिस्तान में भगत सिंह के जन्मदिन पर शहीद मेले के आयाेजन ने साबित कर दिया। भारत की आजादी के नायक भगत सिंह के प्रति दाेनाें तरफ जाे सम्मान उनके 109वें जन्मदिन पर दिखा, लाेगाें में उनके सिद्धांताें और बाताें के प्रति जाे लगाव दिखा, वाे दाे पड़ाेसी मुल्काें के लाेगाें के बीच प्रेम की डाेर बन जाएगा, ऐसा दाेनाें तरफ की सिविल साेसाइटी का भराेसा है।twitter-@dixityogesh email- yogeshnarayan.dixit@gmail.com
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